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अरशद मदनी का बड़ा बयान: RSS की तारीफ में बोले- 'मोहन भागवत से डेढ़ घंटे की बात, मुसलमानों को जोड़ने की जरूरत'

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जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने गुरुवार (28 अगस्त, 2025) को दिल्ली में संगठन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सांप्रदायिकता, मोदी सरकार की नीतियों और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की जमकर तारीफ की और देश में भाईचारे को बढ़ाने की दिशा में उनके प्रयासों की सराहना की।

सांप्रदायिकता पर मदनी का निशाना

मौलाना मदनी ने मुसलमानों के सामने मौजूद चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार और कुछ सांप्रदायिक ताकतें समाज में नफरत फैलाने का काम कर रही हैं। उन्होंने साफ कहा कि देश में अमन और भाईचारा बनाए रखने के लिए सभी को एकजुट होने की जरूरत है। इस दौरान उन्होंने RSS के हालिया प्रस्तावों की तारीफ की और कहा कि अगर ये प्रस्ताव देश को जोड़ने की दिशा में काम करेंगे, तो यह समाज के लिए अच्छा होगा।

मोहन भागवत से डेढ़ घंटे की मुलाकात

जमीयत की बैठक में मदनी ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के साथ अपनी बातचीत का जिक्र किया। उन्होंने बताया, “मेरी मोहन भागवत से डेढ़ घंटे तक बात हुई। मैंने उनसे कहा कि हमें उसी तरह रहने दिया जाए, जैसे हम सदियों से रहते आए हैं। हमें खुशी है कि RSS को अब यह अहसास हो रहा है कि मुसलमानों को करीब लाने की जरूरत है।” मदनी ने यह भी कहा कि अगर RSS वाकई में देश में भाईचारे के लिए काम कर रही है, तो इससे सांप्रदायिक ताकतें कमजोर होंगी।

RSS की तारीफ में क्या बोले मदनी?

मौलाना मदनी ने कहा कि पहले वो RSS के बुलावे पर उनसे मिलने गए थे, लेकिन अब उन्हें लगता है कि RSS को बुलाकर बात करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “RSS अगर हिंदू और मुसलमानों को एक करने की दिशा में काम कर रही है, तो हम इसका स्वागत करते हैं। यही देश की पुरानी परंपरा है, और यही हमें आगे ले जाएगा।” मदनी ने RSS के 100 साल पूरे होने पर उनके प्रस्ताव की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि RSS की कमेटी में जो प्रस्ताव रखा गया, वो उन्हें पसंद आया।

‘हम RSS के खिलाफ नहीं’

मदनी ने साफ किया कि अगर बात हिंदू-मुस्लिम एकता की हो, तो वो RSS के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने बताया कि 8 साल पहले भी उनकी मोहन भागवत से मुलाकात हुई थी, जिसमें उन्होंने यही बात कही थी। madनी ने कहा, “अगर भविष्य में मौका मिला, तो हम फिर मिलेंगे।” काशी और मथुरा के मंदिर विवाद पर बोलते हुए madनी ने कहा कि इस मामले में उनका रुख 1991 के पूजा स्थल अधिनियम (Worship Act) के पक्ष में है।

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