गोरखपुर, 31 अगस्त (Udaipur Kiran) । दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय स्थित महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ ने रविवार को महाकुम्भ पर्व 2025 पुस्तक का विमोचन, कुम्भ पर व्याख्यान एवं शोध प्रतियोगिता का आयोजन किया। मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त मुख्य परिचालन प्रबंधक, पूर्वोत्तर रेलवे के रण विजय सिंह ने कहा कि महाकुम्भ पर्व 2025 पुस्तक कुम्भ के धार्मिक पक्ष, आर्थिक पक्ष एवं सांस्कृतिक पक्ष पर प्रकाश डालती है। कुम्भ के सभी पक्षों को यह पुस्तक छूती है।
उन्होंने कहा कि हम समन्वयकारी संस्कृति के पोषक है। समन्वय कैसे प्राप्त हो इसके सूत्र हमारी संस्कृति देती है। भौगोलिक सीमाएं किसी राष्ट्र का निर्माण नहीं करती सांस्कृतिक समन्वय से किसी राष्ट्र का निर्माण होता है। हर कुम्भ मे देश के एक छोर से दूसरे छोर के लोग आते जाते है। कुम्भ का इसीलिए आयोजन होता है कि देश के लोग एक दूसरे को जाने। उन्होंने भारतीय ज्ञान परम्परा कि चर्चा करते हुए कहा कि हमारा खगोलशास्त्र आदि उन्नत था। धर्म, संस्कृति एवं विज्ञान कुम्भ की गंगा यमुना सरस्वती है। जिसके संगम पर कुम्भ एवं देश का निर्माण होता है। कुम्भ का सबसे बड़ा उद्देश्य है राष्ट्रीय एकता एवं समाज का समन्वय। कुम्भ में विमर्श का आयोजन होता है। हमारी परम्पराएं गूढ़ार्थ लिए हुए है। समाज, कानून एवं दैव के भय से समाज की व्यवस्थाएं चलती है।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि रण विजय सिंह, कुलपति प्रो. पूनम टंडन, प्रो. अनुभूति दूबे एवं डॉ. कुशल नाथ मिश्र के द्वारा गोरखनाथ जी के चित्र पर पुष्पार्चन तथा गोरक्षनाथ शोधपीठ के उप निदेशक डॉ. कुशल नाथ मिश्र के स्वागत भाषण के साथ किया गया। इसके उपरांत महाकुम्भ पर्व 2025 पुस्तक का विमोचन किया गया। इस पुस्तक का सम्पादन गोरक्षनाथ शोधपीठ के उप निदेशक डॉ. कुशल नाथ मिश्रा तथा सहायक निदेशक डॉ. सोनल सिंह द्वारा किया गया है। शोधपीठ के डॉ. मनोज कुमार द्विवेदी, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. हर्षवर्धन सिंह एवं चिन्मयानन्द मल्ल ने सम्पादन सहयोग किया है। कुम्भ पर भारत वर्ष के विभिन्न विद्वानों के लेख को इस पुस्तक में संकलित किया गया है। इस पुस्तक में इसके प्राचीन पारंपरिक स्वरुप से लेकर आधुनिक स्वरुप तक विशेष रूप से 2025 मे आयोजित हुए कुम्भ के वैदेशिक, आर्थिक एवं तकनीकी पक्षों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया है।
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(Udaipur Kiran) / प्रिंस पाण्डेय
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